Electric Bus Wireless Charging Road अब इलेक्ट्रिक बसों को घंटों चार्जिंग पर खड़ा करने का झंझट खत्म होने वाला है. सड़क पर खड़ी-खड़ी बस हो जाएगी चार्ज
Electric Bus Wireless Charging Road इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर सबसे बड़ी टेंशन रहती है चार्जिंग की। बस चार्ज करो, घंटों इंतजार करो और चार्ज खत्म तो फिर बस खड़ी। लेकिन अब इस झंझट को खत्म करने के लिए एक ऐसी जादुई तकनीक आ गई है, जहां खुद सड़क ही बस को चार्ज कर देगी। जी हां, न केबल लगानी पड़ेगी, न चार्जिंग स्टेशन पर लाइन में लगना पड़ेगा। बस सड़क पर चलेगी और ऑटोमैटिक चार्ज होती रहेगी।
Electric Bus Wireless Charging Road इस तकनीक का नाम है Wireless Electric Road System (WERS) या Dynamic Wireless Charging और सबसे बड़ी खुशखबरी ये है कि इस तकनीक का ट्रायल भारत में भी शुरू हो गया है। स्वीडन और इटली के बाद अब मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में इस पर काम शुरू हो चुका है। अगर ये प्रोजेक्ट सफल हो गया, तो आने वाले 2 साल में उज्जैन, इंदौर और भोपाल में चलने वाली इलेक्ट्रिक सिटी बसें कभी भी चार्जिंग के लिए नहीं रुकेंगी।
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कैसे काम करेगी ये जादुई सड़क? समझिए आसान भाषा में (Electric Bus Wireless Charging Road)
Electric Bus Wireless Charging Road यह तकनीक बिल्कुल वैसे ही काम करती है जैसे आपका वायरलेस मोबाइल चार्जर काम करता है। आप मोबाइल को चार्जर पर रखते हैं और बिना केबल के चार्जिंग शुरू हो जाती है। ठीक वैसे ही सड़क के नीचे चार्जिंग कॉइल लगाई जाएंगी।
- सड़क के नीचे कॉपर कॉइल- सड़क की सबसे नीचे वाली लेयर में हर 1 मीटर की दूरी पर एक खास तरह की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कॉइल बिछाई जाती है। यह कॉइल बिजली से जुड़ी होती है, लेकिन ऊपर से पूरी तरह सुरक्षित होती है।
- बस के नीचे रिसीवर पैड- इलेक्ट्रिक बस के नीचे भी एक रिसीवर पैड लगाया जाता है। जैसे ही बस उस सड़क के ऊपर से गुजरती है, सड़क की कॉइल से निकलने वाला मैग्नेटिक फील्ड बस के रिसीवर को एक्टिव कर देता है।
- चलते-चलते चार्जिंग- बस जैसे ही 40 से 60 की स्पीड से उस सड़क पर चलेगी, उसकी बैटरी अपने आप चार्ज होने लगेगी। बस को रुकने की जरूरत नहीं है। 1 किलोमीटर की ऐसी सड़क पर चलने से बस लगभग 15 से 20 प्रतिशत तक चार्ज हो जाएगी।
- पूरी तरह सुरक्षित- इस सड़क पर आम लोग पैदल चल सकते हैं, पानी भरने पर भी करंट नहीं आएगा। क्योंकि यह सिस्टम तभी एक्टिव होता है जब ऊपर से कोई अप्रूव्ड इलेक्ट्रिक बस गुजरती है। बाकी समय यह स्लीप मोड में रहता है।
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भारत में कहां शुरू हुआ ट्रायल? (Electric Bus Wireless Charging Road)
Electric Bus Wireless Charging Road केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस प्रोजेक्ट को ग्रीन लाइट दे दी है।
- महाराष्ट्र में- पुणे से मुंबई के बीच 5 किलोमीटर के हाईवे पर इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ है।
- मध्यप्रदेश में- इंदौर के सुपर कॉरिडोर और भोपाल के BRTS कॉरिडोर में 2-2 किलोमीटर की ऐसी सड़क बनाने का प्रस्ताव पास हुआ है। उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को देखते हुए हरिफाटक से महाकाल मंदिर तक के मार्ग पर भी इस तकनीक पर विचार किया जा रहा है।
Electric Bus Wireless Charging Road स्वीडन में इस तकनीक से एक इलेक्ट्रिक ट्रक ने 1.5 किलोमीटर की सड़क पर चलते हुए अपनी बैटरी का 70 प्रतिशत चार्ज कर लिया था। उसी सफलता के बाद अब भारत में भी कंपनियां आगे आ रही हैं।
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इस तकनीक से क्या-क्या फायदे होंगे? 5 बड़े बदलाव (Electric Bus Wireless Charging Road)
Electric Bus Wireless Charging Road इस तकनीक से क्या-क्या फायदे होंगे? 5 बड़े बदलाव इस प्रकार है:-
- चार्जिंग स्टेशन की टेंशन खत्म- अभी एक इलेक्ट्रिक बस को फुल चार्ज होने में 3 से 4 घंटे लगते हैं। इस नई सड़क से बस डिपो में घंटों खड़े रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बस रूट पर चलते-चलते ही चार्ज हो जाएगी।
- छोटी बैटरी, कम कीमत- अभी बसों में बड़ी-बड़ी बैटरी लगती है जो बहुत महंगी होती है और वजन भी ज्यादा होता है। अगर सड़क ही चार्ज करेगी, तो छोटी बैटरी से भी काम चल जाएगा। इससे बसों की कीमत 30 प्रतिशत तक कम हो सकती है।
- प्रदूषण होगा जीरो (Electric Bus Wireless Charging Road)– डीजल बसों से उज्जैन और इंदौर में बहुत प्रदूषण होता है। इलेक्ट्रिक बसें चार्जिंग की वजह से ज्यादा नहीं चल पा रही थीं, लेकिन इस तकनीक से 24 घंटे इलेक्ट्रिक बसें चल सकेंगी और शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स सुधरेगा।
- केबल चोरी और खराब होने का डर नहीं- अभी चार्जिंग स्टेशन पर केबल टूटना, चोरी होना आम बात है। इस वायरलेस सिस्टम में सड़क के नीचे सब कुछ है, इसलिए कोई चोरी या तोड़फोड़ नहीं कर सकता।
- रात में भी ऑटो चार्जिंग- बस स्टैंड पर बस खड़ी रहेगी और नीचे लगी सड़क उसे धीरे-धीरे चार्ज करती रहेगी। सुबह तक बस 100 प्रतिशत चार्ज मिलेगी।
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कितना आएगा खर्च और कब तक आएगी सड़क? (Electric Bus Wireless Charging Road)
Electric Bus Wireless Charging Road एक रिपोर्ट के अनुसार, 1 किलोमीटर की वायरलेस चार्जिंग सड़क बनाने में लगभग 4 से 5 करोड़ रुपये का खर्च आता है, जो नॉर्मल सड़क से 3 गुना ज्यादा है। लेकिन लंबे समय में यह फायदे का सौदा है, क्योंकि इससे चार्जिंग स्टेशन बनाने का करोड़ों का खर्च बचेगा और बिजली की खपत भी 40 प्रतिशत कम होगी।
Electric Bus Wireless Charging Road भारत सरकार ने इस तकनीक के लिए 2026-27 के बजट में 500 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है। NHAI और राज्य सरकारें मिलकर इसे PPP मॉडल पर बनाएंगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 2027 के अंत तक भारत के 5 शहरों में यह जादुई सड़क बनकर तैयार हो जाएगी।
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क्या कार और बाइक भी इस सड़क पर चार्ज होंगी? (Electric Bus Wireless Charging Road)
Electric Bus Wireless Charging Road फिलहाल यह तकनीक सिर्फ इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों के लिए बनाई जा रही है, क्योंकि उनके नीचे बड़ा रिसीवर लगाना आसान है। लेकिन आने वाले समय में कंपनी ऐसी किट ला रही है जिसे इलेक्ट्रिक कार, ऑटो और स्कूटर में भी लगाया जा सकेगा। तब आप अपनी इलेक्ट्रिक स्कूटी को ऐसी सड़क पर चलाकर ही चार्ज कर सकेंगे।
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Electric Bus Wireless Charging Road तो कुल मिलाकर, जिस चार्जिंग को इलेक्ट्रिक गाड़ियों की सबसे बड़ी कमजोरी माना जाता था, अब वही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनने जा रही है। वह दिन दूर नहीं जब उज्जैन की सड़कें खुद ही बसों को चार्ज करेंगी और आपको केबल का झंझट ही नही रहेगा।
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