Khet Bachao Abhiyan-2026 खेत बचाओ अभियान भारत सरकार द्वारा मिट्टी की सेहत सुधारने और कृषि लागत कम करने के उद्देश्य से शुरू किया गया एक व्यापक राष्ट्रव्यापी अभियान
Khet Bachao Abhiyan-2026 किसानों की घटती आय और लगातार बिगड़ रही मिट्टी की उर्वरा शक्ति को देखते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने आज नई दिल्ली के पूसा परिसर से देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की। इस अभियान का मुख्य मकसद अगले 5 साल में देश के 12 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि की सेहत सुधारना और रासायनिक खादों पर निर्भरता को 30% तक कम करना है।
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क्या है ‘खेत बचाओ अभियान’? (Khet Bachao Abhiyan-2026)
Khet Bachao Abhiyan-2026 कृषि मंत्री ने बताया कि पिछले 20 सालों में अत्यधिक रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल से खेतों की जैविक कार्बन मात्रा 0.8% से घटकर 0.3% रह गई है। पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी और बिहार के कई जिलों में तो मिट्टी लगभग बंजर होने की कगार पर है। इसी संकट से निपटने के लिए ‘खेत बचाओ अभियान’ को मिशन मोड में चलाया जाएगा।
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इस योजना के 3 मुख्य स्तंभ हैं (Khet Bachao Abhiyan-2026)
Khet Bachao Abhiyan-2026 इस योजना के 3 मुख्य स्तंभ इस प्रकार है:-
- मिट्टी परीक्षण से उपचार तक- हर गांव में मोबाइल सॉइल टेस्टिंग वैन जाएगी। किसान को 48 घंटे में सॉइल हेल्थ कार्ड और ‘खेत का डॉक्टर’ ऐप पर फसल-वार खाद की सटीक डोज मिलेगी।
- प्राकृतिक खेती को बढ़ावा- 1 करोड़ किसानों को गोबर, जीवामृत, बीजामृत बनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। देसी गाय रखने पर ₹900/माह की सहायता सीधे खाते में आएगी।
- फसल अवशेष प्रबंधन- पराली जलाने से रोकने के लिए हर ब्लॉक में बायो-डीकंपोजर का मुफ्त छिड़काव होगा। अवशेष से बायोचार बनाने वाली 5,000 यूनिट लगाई जाएंगी।
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जानिए किसानों को सीधे क्या फायदा मिलेगा? (Khet Bachao Abhiyan-2026)
Khet Bachao Abhiyan-2026 किसानों को सीधे फायदा मिलेगा:-
- ₹6,000 प्रति एकड़ अनुदान- जो किसान 3 साल तक प्राकृतिक खेती करेगा, उसे जैविक प्रमाणीकरण के साथ ₹6,000/एकड़ की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। पहले साल ₹2,000, दूसरे साल ₹2,000 और तीसरे साल ₹2,000।
- सस्ती जांच, मुफ्त सलाह- सॉइल हेल्थ कार्ड पहले ₹300 में बनता था, अब पूरी तरह मुफ्त। हर जिले में ‘मृदा मित्र’ नियुक्त होंगे जो खेत पर जाकर सलाह देंगे।
- बाजार से लिंकेज- प्राकृतिक खेती से उगाए अनाज, सब्जी और फल के लिए ‘भारत ऑर्गेनिक ब्रांड’ के तहत FPO के जरिए सीधी सरकारी खरीद होगी। MSP से 20% ज्यादा रेट मिलेगा।
- ड्रोन से नैनो यूरिया छिड़काव- यूरिया की खपत 50% घटाने के लिए 10,000 किसान ड्रोन पायलट तैयार किए जाएंगे। एक एकड़ में छिड़काव का खर्च सिर्फ ₹150 होगा।
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क्यों पड़ी इस अभियान की जरूरत? (Khet Bachao Abhiyan-2026)
Khet Bachao Abhiyan-2026 भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की रिपोर्ट के मुताबिक देश की 37% जमीन में नाइट्रोजन, 24% में फॉस्फोरस और 48% में पोटाश की कमी है। वहीं 70% मिट्टी में जिंक और बोरॉन नहीं बचा। इसकी वजह से गेहूं की पैदावार 2016 के मुकाबले 11% और धान की 9% घट गई है।
Khet Bachao Abhiyan-2026 कृषि मंत्री ने कहा, “हमने हरित क्रांति में पैदावार बढ़ाई, लेकिन मिट्टी की सेहत की कीमत पर। अब ‘सदाबहार क्रांति’ का समय है। अगर खेत बचेगा तभी किसान बचेगा और तभी देश बचेगा। 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है तो खेतों को जहरमुक्त करना ही होगा।”
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कैसे काम करेगा अभियान? (Khet Bachao Abhiyan-2026)
Khet Bachao Abhiyan-2026 अभियान को 3 फेज में बांटा गया है।
- फेज-1: दिसंबर 2026 से मार्च 2027
इसमें 100 सबसे ज्यादा खराब मिट्टी वाले जिलों को चुना गया है। पंजाब के बठिंडा, हरियाणा के करनाल, यूपी के अलीगढ़, बिहार के मुजफ्फरपुर समेत 100 जिलों में काम शुरू होगा। हर गांव में ‘किसान पाठशाला’ लगेगी जहां वैज्ञानिक किसानों को ट्रेनिंग देंगे। - फेज-2: अप्रैल 2027 से मार्च 2029 347 जिलों को कवर किया जाएगा। हर कृषि विज्ञान केंद्र पर 5 एकड़ का ‘प्राकृतिक खेती मॉडल फार्म’ बनेगा।
- फेज-3: अप्रैल 2029 से मार्च 2031 पूरे देश के 6.5 लाख गांवों तक योजना पहुंचेगी। लक्ष्य है कि 2031 तक देश की 50% खेती प्राकृतिक तरीके से हो।
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बजट और निगरानी (Khet Bachao Abhiyan-2026)
Khet Bachao Abhiyan-2026 ‘खेत बचाओ अभियान’ के लिए ₹1.2 लाख करोड़ का बजट तय किया गया है। इसमें से ₹45,000 करोड़ सीधे किसानों के खाते में DBT से जाएंगे। निगरानी के लिए ISRO के सैटेलाइट और AI का इस्तेमाल होगा। हर 15 दिन में मिट्टी की तस्वीर लेकर देखा जाएगा कि जैविक कार्बन बढ़ रहा है या नहीं। ‘खेत बचाओ डैशबोर्ड’ पर कोई भी नागरिक अपने ब्लॉक की प्रगति देख सकेगा।
किसानों की प्रतिक्रिया (Khet Bachao Abhiyan-2026)
Khet Bachao Abhiyan-2026 लॉन्च के मौके पर आए पंजाब के किसान गुरमीत सिंह ने कहा, “पहले 1 एकड़ में 3 बोरी DAP डालते थे, अब मिट्टी मान ही नहीं रही। अगर सरकार ट्रेनिंग और बाजार दे, तो हम जहर छोड़ने को तैयार हैं।” वहीं बिहार की महिला किसान सुनीता देवी ने बताया, “गोबर की खाद से सब्जी का स्वाद लौट आया है। बस रेट सही मिल जाए।”
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विशेषज्ञ क्या कहते हैं? (Khet Bachao Abhiyan-2026)
Khet Bachao Abhiyan-2026 पूसा संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. ए.के. सिंह के अनुसार, “यह भारत का सबसे बड़ा मृदा स्वास्थ्य कार्यक्रम है। अगर सही से लागू हुआ तो 5 साल में खेती की लागत 40% घट जाएगी और पैदावार 25% बढ़ जाएगी। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती किसानों का व्यवहार बदलना है।”
जानिए कैसे जुड़ें अभियान से? (Khet Bachao Abhiyan-2026)
Khet Bachao Abhiyan-2026 इस प्रकार जुड़े अभियान से:-
- टोल फ्री नंबर- 1800-180-1551 पर मिस्ड कॉल देकर रजिस्टर करें।
- एप्प- ‘Khet Bachao’ ऐप डाउनलोड करें, फोटो खींचकर मिट्टी की शुरुआती जांच घर बैठे करें।
- पोर्टल- http://khetbachao.gov.in पर जाकर अपने गांव की मृदा रिपोर्ट देखें।
Khet Bachao Abhiyan-2026 कृषि मंत्रालय का दावा है कि इस अभियान से 2031 तक खेती में रसायनों का इस्तेमाल 50 लाख टन सालाना कम हो जाएगा, जिससे सरकार की सब्सिडी में ₹35,000 करोड़ की बचत होगी। यह पैसा वापस किसानों को प्रोत्साहन के रूप में दिया जाएगा।
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Khet Bachao Abhiyan-2026 केंद्रीय मंत्री ने अंत में कहा, “आज हमने सिर्फ योजना लॉन्च नहीं की, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अन्न का बैंक बचाने की शपथ ली है। जिस दिन हर खेत में केंचुआ दिखने लगेगा, उस दिन समझ लेना कि ‘खेत बचाओ अभियान’ सफल हो गया।”
